मेरा अपना इसमें कुछ भी नहीं .........

जो भी कुछ यहाँ लिखा है जिनेन्द्र देव और जैन तीर्थंकरों की वाणी है !

जैन साधुओं व साध्वियों के प्रवचन हैं !!

सभी को इसे Copy/Share करने की स्वतंत्रता है !

कोई कापीराइट नहीं ..........

Friday, 26 October 2012

Good morning jai jinendra



अत्याचारी दमन चक्र के ,
           सम्मुख गिरि सम अड़े रहो !
अंतिम रक्त बिन्दु तक अपने ,
               सत्य पक्ष पर खड़े रहो !!

कोई रोती आँख मिले न ,
         मिले न मुख की करूण पुकार !
हँसता खिलता हर जीवन हो ,
              विश्व बने यह सुख आगार !!

जीवन है नदिया की धारा ,
               जब चाहो मुड सकती है !
नरक लोक से स्वर्ग लोक से ,
               जब चाहो जुड सकती है !!

अमर  मुनि जी की "अमर क्षणिकाएं " से

Wednesday, 24 October 2012

एक नया इतिहास






आज सुबह रोहतक में एक नया इतिहास लिखा गया जब गुरुवर गुप्तिनंदी जी के सानिद्ध्य में बालकों पर संस्कार  दिये जाने का कार्यक्रम किया गया ! विस्तृत फोटो देखें .........facebook ....jainrohtak@gmail.com पर जाकर .........

Tuesday, 23 October 2012

अब हर घर में रावण बैठा ......


हर तरफ जुल्म है बेबसी है ,सहमा सहमा सा हर आदमी है !
पाप का बोझ बढ़ता ही जाए, जाने कैसे ये धरती थमी है !
आज जिधर देखता हूँ तो बरबस ही ये पंक्तियाँ याद आ जाती हैं , लेकिन जरा सोचिये क्या.... अपने से शुरू करें और देखें अपने भीतर के रावण को ......क्या हम खुद इसी रावण की राह पर नहीं चल रहे ? क्या पराई बहन बेटी को देखकर हमारे मन में उनके प्रति वही भाव होते हैं जो अपनी माँ ,बहन अथवा बेटी को देखकर होते हैं ? क्या हम किसी को मित्रता का आवेदन (facebook etc social networking sites पर )उसकी अच्छाइयां देखकर भेजते हैं या उनकी सुन्दर तस्वीरों को देखकर ? जब देखता हूँ तो पाता हूँ कि आध्यात्म के ग्रुपों में भी लड़के  धडल्ले से आध्यात्मिक पोस्टों पर भी हाय ,हेल्लो करते दिखाई पड़ते हैं ! जब थोडा और देखता हूँ तो पाता हूँ कि बेहिचक सुन्दर लड़कियों /महिलाओं की पोस्ट पर comment में लिखते हुए गिडगिडाते हुए से लड़के दिखाई पड़ते हैं “Please add me ….” और भी पता नहीं क्या क्या दिखाई देता है ...क्या सब के मन में रावण नहीं बैठा .......एक लड़की/महिला  हाय/हेल्लो  क्या कह दे 20-30 comment तो मिनटों में दिखाई दे जाते हैं जबकि किसी सामजिक ,आध्यात्मिक राष्ट्रीय राजनीति य धर्म से जुडी पोस्ट पर Like करना भी दूर की बात है चाहे वो पोस्ट आपके लिए लिखने वाले ने एक –आध घंटा लगा कर ही लिखी हो !
हर साल दशहरे पर हम रावण के पुतले को जला कर खुशियाँ मनाते हैं ! बुराई पर अच्छाई की विजय कहते हैं लेकिन क्या हमारी कथनी और करनी में कहीं सामंजस्य है कहीं ? क्या हम बुराई से दूर जा रहे हैं या उसे आगे बढ़कर और अपना रहे हैं ? क्या हम अपनी शाकाहार की भारतीय सभ्यता और संस्कृति को छोड़ कर मांसाहार की विदेशी संस्कृति को नहीं अपना रहे ? नित्य नए खुल रहे KFC और Mcdonalds क्या हमें पतन और गिरावट की राह पर ले जा रहे हैं ये जानते हैं हम ? ...क्या आज हमारे लिए जो रक्षक होने चाहिये वही हमारे भक्षक नहीं बने हुए ? जरा सोचिये ! विचार कीजिये ! फिर मित्रों को दशहरे की मुबारकबाद दीजिए !
एक आह्वान और करना चाहूँगा ! इस वर्ष से और हर वर्ष  रावण के पुतले जलाना छोडिये ,पटाखे जलाना छोडिये और असंख्य निर्दोष जीवों की मृत्यु का कारण मत बनिए !
मारना ही है तो अपने अंदर के रावण को मारो ! मिटाना ही है तो अज्ञान का अन्धकार मिटाओ ! जलाना ही है तो ज्ञान का दीप जलाओ ! इन्ही भावनाओं के साथ !

Monday, 15 October 2012

मेरा अनुभव –गुरुदेव सिंगला


मेरा अनुभव –गुरुदेव सिंगला
मै आप सबको बताना चाहता हूँ कि आचार्य श्री ने जब से यहाँ चातुर्मास किया है मै हर रोज इनके दर्शन के लिये आता हूँ ! मेरा परम सौभाग्य है कि अग्रवाल परिवार में जन्म लेने के बाद भी मुझे 40  दिन कि उम्र से अब तक दिगम्बर गुरुओं के दर्शन किये हैं ! मैंने सबसे ज्यादा आहार दान दिया ,अभिषेक और पूजा की है ! मैंने दसलक्षण में दस दिन आलू प्याज और बाहर की चीजें खानी छोड़ी ! मै एक ही दिन दसलक्षण में आया था उसी दिन आचार्य श्री ने महावीर भगवान के जन्म के बारे में बताया था ,तब श्री चंद्रगुप्त मुनि ने अपनी मदुर वाणी में लोरी सुनाई थी तो मेरा ध्यान इतना लगा कि मै लोरी सुनते सुनते ही सों गया ! मुझे आहार देने का बड़ा शौक है जब मेरे पेपर चल रहे थे तब भी मै हर रोज आहार देने आता था ! वो पेपर दो मैंने आधे में ही छोड़ दिये थे क्योंकि गुरुदेव के आहार का समय हो गया था ! जब मै घर गया तब  मम्मी ने पूछा पपेर कैसा हुआ तो मैंने कहा पेपर तो अच्छा हुआ पर आधा छूट गया क्योंकि गुरुदेव के आहार का समय हो गया था !
अब मै इस संघ के बारे में कुछ ऐसी बातें बताना चाहता हूँ जो मुझे बहुत अच्छी लगती हैं ! सबसे पहले तो बड़े गुरुदेव ..जब मै पहली बार गुरुदेव को आहार देने आया तो मुझे सभी आंटी और अंकलों ने पीछे भगा दिया ! मै रोने लगा ,जैसे ही गुरुदेव कि नजर मुझ पर पड़ी तो गुरुदेव ने मुझे आगे बुलाकर मुझ से आहार लिया ! अब महिमा सागर जी मुनिश्री ..मै मुनिश्री के पास बहुत सारी मस्ती कर्ता हूँ और जब मुनिश्री के गेट बंद हो जाते हैं तो मै आवाज देता हूँ मुनिश्री ...और मुनिश्री गेट खोल देते हैं ! मुनिश्री सुयाश्गुप्त जी ....इनकी आँखें मुझे बहुत अच्छी लगती हैं ! क्योंकि इनकी आँखों में बड़ी ममता है ! मुनिश्री चंद्रगुप्त जी के साथ जब मै मंदिरजी जाता हूँ तो मुनिश्री मुझे मेरा हाथ पकड़कर ले जाते हैं ! जब मुनिश्री भजन गाते हैं तो मुझे बड़ा अच्छा लगता है तो मै डांस कर्ता हूँ ,इसीलिए मै चाहता हूँ कि मुनिश्री एक भजन रोज सुनाएँ ! आस्थाश्री माताजी ...जब मै पदमावती माता की आरती गाता हूँ तो माताजी सबसे पहले मुझे अपना माइक देती हैं ! धन्यश्री माताजी ....इन्होने मेरी एक बहुत गन्दी आदत छुडवाई ,मै पहले नाख़ून खाता था लेकिन अब नहीं खाता ! अन्त में मै यही कहूँगा कि गुरुओं की कृपा मुझ पर ऐसे ही बनी रहे !
गुरुदेव गुप्तिनंदी जी आये
अपने साथ न जाने कितनी खुशियाँ लाये
इन्होने यहाँ आकर सोये हुए लोगों के भाग जगाये
ऐसे गुरुदेव गुप्तिनंदी जी को हम शीश झुकाएं !
गुरुदेव सिंगला  रोहतक
8  वर्ष