मेरा अपना इसमें कुछ भी नहीं .........

जो भी कुछ यहाँ लिखा है जिनेन्द्र देव और जैन तीर्थंकरों की वाणी है !

जैन साधुओं व साध्वियों के प्रवचन हैं !!

सभी को इसे Copy/Share करने की स्वतंत्रता है !

कोई कापीराइट नहीं ..........

Saturday, 24 December 2011

त्रिलोक तीर्थ

विश्व धरा की अनुपम रचना त्रिलोक तीर्थ कहलायेगा 
यथाशक्ति सहभागी बन लो ,नाम अमर हो जाएगा !

आचार्य विद्याभूषण सन्मति सागर जी की प्रेरणा व निर्देशन से
लगभग सौ करोड रुपये कीलागत से बनने वाला त्रिलोक तीर्थ 
50000 वर्ग गज भूमि में बडगांव (जिला बागपत ,उत्तर प्रदेश ) 
में निर्माणाधीन है ! सभी धर्मानुरागी बंधू यथा शक्ति सहयोग दे !
Mobile :  +919319020157.+919319274175.+919313682430. 

सभी मुनि,आर्यिकाओं ,साधु,साध्वियों,श्रावक,श्राविकाओं
को यथोचित नमोस्तु,वन्दामी,मथे वन्दना ,जय जिनेन्द्र,नमस्कार
शुभ प्रात:


Friday, 23 December 2011

आज का विचार 23.12.2011


आज का विचार 23.12.2011

हम साथ साथ रहते हैं , परन्तु साथ साथ
जीते नही ,बस नाटक कर रहे हैं !  

आर्यिका 105 माता स्वस्ति भुषण जी की
“एक लाख की एक एक बात “ से
सभी मुनि,आर्यिकाओं ,साधु,साध्वियों,श्रावक,श्राविकाओं
को यथोचित नमोस्तु,वन्दामी,मथे वन्दना ,जय जिनेन्द्र,नमस्कार
शुभ प्रात:

धर्म

        "वासना की धुप ,तृष्णा की अग्नि से क्लान्त तथा अज्ञान की यात्रा से थके राही को जहां छाया और विश्रान्ति मिलती है वही धर्म है !"
        "जीवन की संपदा को ,अंतरंग की सत्ता को प्राप्त करने के लिये धर्म किया जाता है ! जीवन नैया को धर्म की पतवार से खेकर ही किनारे पहुंचाया जा सकता है ! त्याग है जीवन को चलाने के लिये तथा धर्म है जीवन की सच्चाई पाने के लिए ! त्याग से शक्ति का संचय होता है ,मन वश में होता है तथा धर्म से हेय उपादेय का विवेक जागृत होता है ! त्याग शरीर  की रक्षा के लिए है व धर्म आत्मा की !"
        धर्म उत्कृष्ट मंगल है ,अहिंसा संयम और तप उसके लक्षण हैं ! जिसका मन सदा धर्म में लगा समाया रहता है ,उसे देवता भी नमस्कार करते हैं !

आचार्य श्री 108  श्री पुष्पदंत सागर जी “आध्यात्म के सुमन” में  
 
सभी मुनि,आर्यिकाओं ,साधु,साध्वियों,श्रावक,श्राविकाओं
को यथोचित नमोस्तु,वन्दामी,मथे वन्दना ,जय जिनेन्द्र,नमस्कार
शुभ प्रात:
   


Thursday, 22 December 2011

आज का विचार 22.12.2011


आज का विचार 22.12.2011

वहम से पुराने प्रेम सम्बन्ध भी टूट जाते हैं !

आर्यिका 105 माता स्वस्ति भुषण जी की
“एक लाख की एक एक बात “ से
सभी मुनि,आर्यिकाओं ,साधु,साध्वियों,श्रावक,श्राविकाओं
को यथोचित नमोस्तु,वन्दामी,मथे वन्दना ,जय जिनेन्द्र,नमस्कार
शुभ प्रात:

नर से नारायण

        "परिग्रह का विमोचन कर दो ,मन शांत हो जाएगा !मन तो चाहता है विराट को ,परम पावन को और हम लगाते  हैं उसे शूद्र बातों में ,एक बार अन्तरंग भावों से परिग्रह का त्याग कर दो ,फिर देखो  तुम्हारा मन कैसे नही रुकता ,कैसे शांत नही होता "
    " नर में  नारायण छुपा है, खोजना आपका काम है! कोई नारायण आकर आपके नारायण को नही निकालेगा, हर आत्मा में नारायण छुपा है भगवान महावीर ने उस नारायण को अपनी सतत साधना से पाया है ! आप भी स्वयं की सतत साधना से उसे पा सकते हैं ! नारायण को जाग्रत करने का पूर्ण 
अधिकार आपके हाथों में सौंप दिया है "
                      जानता हूँ बाग में दो दिन रहेंगे फूल ,
                     जब तक उन्हें हवा मिलती रहेंगी अनुकूल 
                      सोने तक ही आँखों में रहेंगे सपने ,
                     जागने पर सामने पड़ी मिलेगी धुल !
आचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर जी महाराज "आध्यात्म के सुमन " में
सभी मुनि,आर्यिकाओं ,साधु,साध्वियों,श्रावक,श्राविकाओं
को यथोचित नमोस्तु,वन्दामी,मथे वन्दना ,जय जिनेन्द्र,नमस्कार
शुभ प्रात:



Wednesday, 21 December 2011

आज का विचार 21.12.2011


आज का विचार 21.12.2011

मनुष्य अपनी शक्ति को जहां लागा दे
वही कार्य होने लगता है ,चाहे क्रोध में
चाहे प्रेम में !

आर्यिका 105 माता स्वस्ति भुषण जी की
“एक लाख की एक एक बात “ से
सभी मुनि,आर्यिकाओं ,साधु,साध्वियों,श्रावक,श्राविकाओं
को यथोचित नमोस्तु,वन्दामी,मथे वन्दना ,जय जिनेन्द्र,नमस्कार
शुभ प्रात:

नारी

किसी विचारक ने कहा है 
" नारी में जब वात्सल्यमयी भावनाएं ,करुणा ,दया ,
 ममत्व की कमी होती है ,तब क्रूरता उभरती है ,
क्रूरता अनुकरणीय नही है ,जिस दिन नारी उसे स्वीकार कर 
लेगी उस दिन समस्त सदाचारों में विप्लव आ जाएगा !"

 सभी मुनि,आर्यिकाओं ,साधु,साध्वियों,श्रावक,श्राविकाओं
को यथोचित नमोस्तु,वन्दामी,मथे वन्दना ,जय जिनेन्द्र,नमस्कार
शुभ प्रात: