मेरा अपना इसमें कुछ भी नहीं .........

जो भी कुछ यहाँ लिखा है जिनेन्द्र देव और जैन तीर्थंकरों की वाणी है !

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कोई कापीराइट नहीं ..........

Thursday 15 March 2012

प्रश्न : जो दिया बरसात मे बुझ गया ,
          उसे फिर जलाकर क्या करूँ ?
         जो स्वभाव विभाव मे खो गया ,
         उसे वापस बुलाकर क्या करूँ ?
         आप कहते हो तो मान लेता हूँ ,
         मै भी शक्ति रूप परमात्मा हूँ !
        जो परमात्मा स्वयं मे भटक गया ,
        उसे घर वापस बुलाकर क्या करूँ ?
उत्तर : जो खोया है उसे ही तो पाना है ! 
           जो सोया है उसे ही तो जगाना है ,
           इतना उदास क्यों होते हो साथी ?
          जो बुझा है उसे ही तो जलाना है !
           तुम मे अनन्त की संभावना है,
          उसे ही व्यक्त करके दिखाना है !
           जो भूला है निज घर को यहाँ ,
         उसे ही निज घर वापस आना है !
         है रात तो कल सुबह भी आएगी ,
        आज कली है ,कल फूल बन जायेगी !
        घबराओ मत इस अमावस की काली रात मे,
        कल सुबह नई रोशनी लेकर आएगी !
       रोओ मत चाँद तारों की घनी रात मे ,
       जागते रहोगे तो सुबह नई रोशनी ले आएगी !
      तुम अनन्त शक्ति के स्त्रोत  हो साथी ,
      आचरण करोगे तो जिन्दगी मुस्कुराएगी !
  
आचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागरजी

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